यात्रारोज़ दस मिनट का सत्संग।

नित्य · दिन ५

कभी नहीं खोते

कभी नहीं खोते — जो सब में उन्हें देखते हैं, वे उनके लिए कभी नहीं खोते

नाम-स्मरण · ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

बुधवार, ३० सितंबर

कृष्ण चतुर्थी

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स्रोत

यो मां पश्यति सर्वत्रसर्वं च मयि पश्यति।तस्याहं न प्रणश्यामिस च मे न प्रणश्यति॥
दिन ५ · कभी नहीं खोते · तत्सत्