Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ६.३०
यो मां पश्यति सर्वत्रसर्वं च मयि पश्यति।तस्याहं न प्रणश्यामिस च मे न प्रणश्यति॥॥ ६.३० ॥
yo māṁ paśyati sarvatra sarvaṁ ca mayi paśyati / tasyāhaṁ na praṇaśyāmi sa ca me na praṇaśyati
हमारे शब्दों में
जो मुझे सबमें देखते हैं और सबको मुझमें देखते हैं — उनके लिए मैं कभी नहीं खोता, और वे मेरे लिए कभी नहीं खोते।