सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ६.३०

यो मां पश्यति सर्वत्रसर्वं च मयि पश्यति।तस्याहं न प्रणश्यामिस च मे न प्रणश्यति॥॥ ६.३० ॥

yo māṁ paśyati sarvatra sarvaṁ ca mayi paśyati / tasyāhaṁ na praṇaśyāmi sa ca me na praṇaśyati

हमारे शब्दों में

जो मुझे सबमें देखते हैं और सबको मुझमें देखते हैं — उनके लिए मैं कभी नहीं खोता, और वे मेरे लिए कभी नहीं खोते।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ६.३० · तत्सत्