सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ९.१४

सततं कीर्तयन्तो मांयतन्तश्च दृढव्रताः।नमस्यन्तश्च मां भक्त्यानित्ययुक्ता उपासते॥॥ ९.१४ ॥

satataṁ kīrtayanto māṁ yatantaś ca dṛḍha-vratāḥ / namasyantaś ca māṁ bhaktyā nitya-yuktā upāsate

हमारे शब्दों में

सदा मेरा कीर्तन करते, दृढ़ व्रत से यत्न करते, और भक्ति से मुझे नमन करते हुए — वे नित्य मुझसे जुड़े रहकर मेरी उपासना करते हैं।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ९.१४ · तत्सत्