Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ९.१४
सततं कीर्तयन्तो मांयतन्तश्च दृढव्रताः।नमस्यन्तश्च मां भक्त्यानित्ययुक्ता उपासते॥॥ ९.१४ ॥
satataṁ kīrtayanto māṁ yatantaś ca dṛḍha-vratāḥ / namasyantaś ca māṁ bhaktyā nitya-yuktā upāsate
हमारे शब्दों में
सदा मेरा कीर्तन करते, दृढ़ व्रत से यत्न करते, और भक्ति से मुझे नमन करते हुए — वे नित्य मुझसे जुड़े रहकर मेरी उपासना करते हैं।