सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ९.२७

यत्करोषि यदश्नासियज्जुहोषि ददासि यत्।यत्तपस्यसि कौन्तेयतत्कुरुष्व मदर्पणम्॥॥ ९.२७ ॥

yat karoṣi yad aśnāsi yaj juhoṣi dadāsi yat / yat tapasyasi kaunteya tat kuruṣva mad-arpaṇam

हमारे शब्दों में

जो कुछ करते हो, जो खाते हो, जो हवन करते हो, जो दान देते हो, जो तप करते हो, अर्जुन — वह सब मुझे अर्पित कर दो।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ९.२७ · तत्सत्