सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता १५.१२

यदादित्यगतं तेजोजगद्भासयतेऽखिलम्।यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौतत्तेजो विद्धि मामकम्॥॥ १५.१२ ॥

yad ādityagataṁ tejo jagad bhāsayate ’khilam / yac candramasi yac cāgnau tat tejo viddhi māmakam

हमारे शब्दों में

सूर्य में रहकर जो तेज सारे जगत को उजाला देता है, और जो तेज चंद्रमा में है और अग्नि में — उस तेज को मेरा जानो।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता १५.१२ · तत्सत्