Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ८.७
तस्मात्सर्वेषु कालेषुमामनुस्मर युध्य च।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः॥॥ ८.७ ॥
tasmāt sarveṣu kāleṣu mām anusmara yudhya ca / mayy arpita-mano-buddhir mām evaiṣyasy asaṁśayaḥ
हमारे शब्दों में
इसलिए हर समय मेरा स्मरण करते रहो, और युद्ध भी करो। मन और बुद्धि मुझे अर्पित करके तुम मेरे पास ही आओगे — इसमें कोई संशय नहीं।