सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ८.७

तस्मात्सर्वेषु कालेषुमामनुस्मर युध्य च।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः॥॥ ८.७ ॥

tasmāt sarveṣu kāleṣu mām anusmara yudhya ca / mayy arpita-mano-buddhir mām evaiṣyasy asaṁśayaḥ

हमारे शब्दों में

इसलिए हर समय मेरा स्मरण करते रहो, और युद्ध भी करो। मन और बुद्धि मुझे अर्पित करके तुम मेरे पास ही आओगे — इसमें कोई संशय नहीं।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ८.७ · तत्सत्