Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैदुर्गा सप्तशती ११.१०
सर्वमङ्गलमाङ्गल्येशिवे सर्वार्थसाधिके।शरण्ये त्र्यम्बके गौरिनारायणि नमोऽस्तु ते॥॥ ११.१० ॥
sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike / śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo ’stu te
श्लोक-पाठ