सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

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सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

दुर्गा सप्तशती ११.१०

सर्वमङ्गलमाङ्गल्येशिवे सर्वार्थसाधिके।शरण्ये त्र्यम्बके गौरिनारायणि नमोऽस्तु ते॥॥ ११.१० ॥

sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike / śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo ’stu te

श्लोक-पाठ

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

दुर्गा सप्तशती ११.१० · तत्सत्