Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता १५.१३
गामाविश्य च भूतानिधारयाम्यहमोजसा।पुष्णामि चौषधीः सर्वाःसोमो भूत्वा रसात्मकः॥॥ १५.१३ ॥
gām āviśya ca bhūtāni dhārayāmy aham ojasā / puṣṇāmi cauṣadhīḥ sarvāḥ somo bhūtvā rasātmakaḥ
हमारे शब्दों में
धरती में बसकर मैं सब जीवों को अपने बल से थामे रखता हूँ, और सारी वनस्पतियों का पोषण करता हूँ — रस से भरा चंद्रमा बनकर।