Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ९.२९
समोऽहं सर्वभूतेषुन मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः।ये भजन्ति तु मां भक्त्यामयि ते तेषु चाप्यहम्॥॥ ९.२९ ॥
samo ’haṁ sarva-bhūteṣu na me dveṣyo ’sti na priyaḥ / ye bhajanti tu māṁ bhaktyā mayi te teṣu cāpy aham
हमारे शब्दों में
मैं सब प्राणियों के लिए एक-सा हूँ; न मुझे किसी से द्वेष है, न किसी के प्रति पक्षपात। पर जो मुझे भक्ति से भजें, वे मुझमें हैं, और मैं उनमें।