सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

दुर्गा सप्तशती ४.१७

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोःस्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्यासर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥॥ ४.१७ ॥

durge smṛtā harasi bhītim aśeṣa-jantoḥ svasthaiḥ smṛtā matim atīva śubhāṁ dadāsi / dāridrya-duḥkha-bhaya-hāriṇi kā tvad anyā sarvopakāra-karaṇāya sadārdra-cittā

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

दुर्गा सप्तशती ४.१७ · तत्सत्