सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ६.३५

असंशयं महाबाहोमनो दुर्निग्रहं चलम्।अभ्यासेन तु कौन्तेयवैराग्येण च गृह्यते॥॥ ६.३५ ॥

asaṁśayaṁ mahā-bāho mano durnigrahaṁ calam / abhyāsena tu kaunteya vairāgyeṇa ca gṛhyate

हमारे शब्दों में

निस्संदेह, अर्जुन, मन चंचल है और इसे थामना कठिन है; पर अभ्यास से और वैराग्य से यह थमता है।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ६.३५ · तत्सत्