सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता २.६५

प्रसादे सर्वदुःखानांहानिरस्योपजायते।प्रसन्नचेतसो ह्याशुबुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥॥ २.६५ ॥

prasāde sarva-duḥkhānāṁ hānir asyopajāyate / prasanna-cetaso hy āśu buddhiḥ paryavatiṣṭhate

हमारे शब्दों में

मन के निर्मल और प्रसन्न होने पर सारे दुख मिट जाते हैं; जिसका चित्त प्रसन्न है, उसकी बुद्धि जल्दी ही स्थिर हो जाती है।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता २.६५ · तत्सत्