मुखपृष्ठरोज़ दस मिनट का सत्संग।
सुबह की रोशनी में पत्थर के मंदिर में पीतल का दीयामंदिर में जलता हुआ पीतल का दीया और पानी में उसकी झलक

श्रवण से स्मरण तक — भक्ति की एक सहज राह।

आपकी रोज़ की भक्ति का साथी।

शास्त्रों के वचन और उनका सरल अर्थ सुनिए, नाम-स्मरण और मौन में ठहरिए, और उस भाव को अपने दिन में साथ ले जाइए — जब भी आपका मन हो।

लगभग १० मिनट · स्वर हिन्दी में

यात्रा · ११–२० अक्टूबर

नवरात्रि साधना

नौ दिन, नौ रूप · प्रतिपदा से विजयादशमी तक

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Cited, never invented.

हर बात का प्रमाण — अध्याय, श्लोक के साथ।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

यह आपकी अपनी पूजा-आरती का स्थान नहीं लेता — उसका साथी है।