सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ९.२६

पत्रं पुष्पं फलं तोयंयो मे भक्त्या प्रयच्छति।तदहं भक्त्युपहृतम्अश्नामि प्रयतात्मनः॥॥ ९.२६ ॥

patraṁ puṣpaṁ phalaṁ toyaṁ yo me bhaktyā prayacchati / tad ahaṁ bhakty-upahṛtam aśnāmi prayatātmanaḥ

हमारे शब्दों में

पत्ता, फूल, फल, जल — जो कोई मुझे भक्ति से देता है, उस सच्चे मन वाले का भक्ति से लाया हुआ वह — मैं ले लेता हूँ।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ९.२६ · तत्सत्