Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ९.१७
पिताहमस्य जगतोमाता धाता पितामहः।वेद्यं पवित्रमोङ्कारऋक्साम यजुरेव च॥॥ ९.१७ ॥
pitāham asya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ / vedyaṁ pavitram oṅkāra ṛk sāma yajur eva ca
हमारे शब्दों में
इस जगत का पिता, माता, धारण करने वाला और पितामह मैं हूँ; जानने योग्य, पवित्र करने वाला, ओंकार, तथा ऋग्, साम और यजुर्वेद भी मैं हूँ।