Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता १७.२४
तस्मादोमित्युदाहृत्ययज्ञदानतपःक्रियाः।प्रवर्तन्ते विधानोक्ताःसततं ब्रह्मवादिनाम्॥॥ १७.२४ ॥
tasmād om ity udāhṛtya yajña-dāna-tapaḥ-kriyāḥ / pravartante vidhānoktāḥ satataṁ brahma-vādinām
हमारे शब्दों में
इसीलिए ब्रह्मवादी जन विधि में बताए यज्ञ, दान और तप के कर्म सदा ॐ कहकर ही आरम्भ करते हैं।