सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता १७.२४

तस्मादोमित्युदाहृत्ययज्ञदानतपःक्रियाः।प्रवर्तन्ते विधानोक्ताःसततं ब्रह्मवादिनाम्॥॥ १७.२४ ॥

tasmād om ity udāhṛtya yajña-dāna-tapaḥ-kriyāḥ / pravartante vidhānoktāḥ satataṁ brahma-vādinām

हमारे शब्दों में

इसीलिए ब्रह्मवादी जन विधि में बताए यज्ञ, दान और तप के कर्म सदा ॐ कहकर ही आरम्भ करते हैं।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता १७.२४ · तत्सत्