Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैदुर्गा सप्तशती ११.१२
शरणागतदीनार्त-परित्राणपरायणे।सर्वस्यार्तिहरे देविनारायणि नमोऽस्तु ते॥॥ ११.१२ ॥
śaraṇāgata-dīnārta-paritrāṇa-parāyaṇe / sarvasyārti-hare devi nārāyaṇi namo ’stu te