सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

दुर्गा सप्तशती ११.१२

शरणागतदीनार्त-परित्राणपरायणे।सर्वस्यार्तिहरे देविनारायणि नमोऽस्तु ते॥॥ ११.१२ ॥

śaraṇāgata-dīnārta-paritrāṇa-parāyaṇe / sarvasyārti-hare devi nārāyaṇi namo ’stu te

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

दुर्गा सप्तशती ११.१२ · तत्सत्