Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता १७.२३
ॐ तत्सदिति निर्देशोब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः।ब्राह्मणास्तेन वेदाश्चयज्ञाश्च विहिताः पुरा॥॥ १७.२३ ॥
oṁ tat sad iti nirdeśo brahmaṇas tri-vidhaḥ smṛtaḥ / brāhmaṇās tena vedāś ca yajñāś ca vihitāḥ purā
हमारे शब्दों में
ॐ, तत्, सत् — इन तीन शब्दों को एक ही परमात्मा के नाम माना गया है। आदि में उसी से ज्ञानी जन, वेद और यज्ञ रचे गए।
श्लोक-पाठ