सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

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सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता १७.२३

ॐ तत्सदिति निर्देशोब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः।ब्राह्मणास्तेन वेदाश्चयज्ञाश्च विहिताः पुरा॥॥ १७.२३ ॥

oṁ tat sad iti nirdeśo brahmaṇas tri-vidhaḥ smṛtaḥ / brāhmaṇās tena vedāś ca yajñāś ca vihitāḥ purā

हमारे शब्दों में

ॐ, तत्, सत् — इन तीन शब्दों को एक ही परमात्मा के नाम माना गया है। आदि में उसी से ज्ञानी जन, वेद और यज्ञ रचे गए।

श्लोक-पाठ

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता १७.२३ · तत्सत्