सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता १७.२५

तदित्यनभिसन्धायफलं यज्ञतपःक्रियाः।दानक्रियाश्च विविधाःक्रियन्ते मोक्षकाङ्क्षिभिः॥॥ १७.२५ ॥

tad ity anabhisandhāya phalaṁ yajña-tapaḥ-kriyāḥ / dāna-kriyāś ca vividhāḥ kriyante mokṣa-kāṅkṣibhiḥ

हमारे शब्दों में

‘तत्’ कहकर, फल की चाह रखे बिना, मोक्ष चाहने वाले यज्ञ और तप के कर्म तथा तरह-तरह के दान करते हैं।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता १७.२५ · तत्सत्