Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता १८.७८
यत्र योगेश्वरः कृष्णोयत्र पार्थो धनुर्धरः।तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥॥ १८.७८ ॥
yatra yogeśvaraḥ kṛṣṇo yatra pārtho dhanurdharaḥ / tatra śrīr vijayo bhūtir dhruvā nītir matir mama
हमारे शब्दों में
जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर पार्थ हैं, वहीं सौभाग्य है, विजय है, उन्नति है और अटल नीति है — ऐसा मैं मानता हूँ।