Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैदुर्गा सप्तशती ११.६
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाःस्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु।त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥॥ ११.६ ॥
vidyāḥ samastās tava devi bhedāḥ striyaḥ samastāḥ sakalā jagatsu / tvayaikayā pūritam ambayaitat kā te stutiḥ stavya-parā paroktiḥ