Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ११.४०
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्तेनमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व।अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वंसर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः॥॥ ११.४० ॥
namaḥ purastād atha pṛṣṭhatas te namo ’stu te sarvata eva sarva / ananta-vīryāmita-vikramas tvaṁ sarvaṁ samāpnoṣi tato ’si sarvaḥ