सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ६.४७

योगिनामपि सर्वेषांमद्गतेनान्तरात्मना।श्रद्धावान्भजते यो मांस मे युक्ततमो मतः॥॥ ६.४७ ॥

yoginām api sarveṣāṁ mad-gatenāntar-ātmanā / śraddhāvān bhajate yo māṁ sa me yuktatamo mataḥ

हमारे शब्दों में

सब योगियों में भी — जिसका अंतर्मन मुझमें लगा हो और जो श्रद्धा से मुझे भजे, उसे मैं अपने सबसे पास मानता हूँ।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ६.४७ · तत्सत्