Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ६.४७
योगिनामपि सर्वेषांमद्गतेनान्तरात्मना।श्रद्धावान्भजते यो मांस मे युक्ततमो मतः॥॥ ६.४७ ॥
yoginām api sarveṣāṁ mad-gatenāntar-ātmanā / śraddhāvān bhajate yo māṁ sa me yuktatamo mataḥ
हमारे शब्दों में
सब योगियों में भी — जिसका अंतर्मन मुझमें लगा हो और जो श्रद्धा से मुझे भजे, उसे मैं अपने सबसे पास मानता हूँ।