सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता २.४०

नेहाभिक्रमनाशोऽस्तिप्रत्यवायो न विद्यते।स्वल्पमप्यस्य धर्मस्यत्रायते महतो भयात्॥॥ २.४० ॥

nehābhikrama-nāśo ’sti pratyavāyo na vidyate / svalpam apy asya dharmasya trāyate mahato bhayāt

हमारे शब्दों में

इस साधना में आरम्भ किया हुआ कुछ भी खोता नहीं, और न उससे कोई उलटा फल होता है; इस धर्म का थोड़ा-सा पालन भी बड़े भय से बचा लेता है।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता २.४० · तत्सत्