Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ५.२९
भोक्तारं यज्ञतपसांसर्वलोकमहेश्वरम्।सुहृदं सर्वभूतानांज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति॥॥ ५.२९ ॥
bhoktāraṁ yajña-tapasāṁ sarva-loka-maheśvaram / suhṛdaṁ sarva-bhūtānāṁ jñātvā māṁ śāntim ṛcchati
हमारे शब्दों में
यज्ञ और तप को स्वीकार करने वाला, सब लोकों का महान स्वामी, सब जीवों का सुहृद — जो मुझे ऐसा जान ले, उसे शान्ति मिलती है।