सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ६.२४

सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः।मनसैवेन्द्रियग्रामंविनियम्य समन्ततः॥॥ ६.२४ ॥

saṅkalpa-prabhavān kāmāṁs tyaktvā sarvān aśeṣataḥ / manasaivendriya-grāmaṁ viniyamya samantataḥ

हमारे शब्दों में

मन की कल्पनाओं से उपजी सब कामनाओं को, कुछ भी बचाए बिना, छोड़कर, और मन से ही सब इन्द्रियों को हर ओर से समेटकर…

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ६.२४ · तत्सत्