Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ६.२४
सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः।मनसैवेन्द्रियग्रामंविनियम्य समन्ततः॥॥ ६.२४ ॥
saṅkalpa-prabhavān kāmāṁs tyaktvā sarvān aśeṣataḥ / manasaivendriya-grāmaṁ viniyamya samantataḥ
हमारे शब्दों में
मन की कल्पनाओं से उपजी सब कामनाओं को, कुछ भी बचाए बिना, छोड़कर, और मन से ही सब इन्द्रियों को हर ओर से समेटकर…