सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता १०.१०

तेषां सततयुक्तानांभजतां प्रीतिपूर्वकम्।ददामि बुद्धियोगं तंयेन मामुपयान्ति ते॥॥ १०.१० ॥

teṣāṁ satata-yuktānāṁ bhajatāṁ prīti-pūrvakam / dadāmi buddhi-yogaṁ taṁ yena mām upayānti te

हमारे शब्दों में

जो सदा मुझसे जुड़े रहकर प्रेम से मुझे भजते हैं, उन्हें मैं बुद्धि का वह योग देता हूँ, जिसके सहारे वे मुझ तक आ पहुँचते हैं।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता १०.१० · तत्सत्