Cited, never invented.
सभी श्लोक
तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।
सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।
तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता हैगीता ९.२२
अनन्याश्चिन्तयन्तो मांये जनाः पर्युपासते।तेषां नित्याभियुक्तानांयोगक्षेमं वहाम्यहम्॥॥ ९.२२ ॥
ananyāś cintayanto māṁ ye janāḥ paryupāsate / teṣāṁ nityābhiyuktānāṁ yoga-kṣemaṁ vahāmy aham
हमारे शब्दों में
जो लोग अनन्य भाव से मेरा चिंतन करते हुए मेरी उपासना में लगे रहते हैं, सदा मुझसे जुड़े उन लोगों का योगक्षेम — जो नहीं है उसे देना, जो है उसे सँभालना — मैं स्वयं अपने ऊपर लेता हूँ।