सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता ९.३१

क्षिप्रं भवति धर्मात्माशश्वच्छान्तिं निगच्छति।कौन्तेय प्रतिजानीहिन मे भक्तः प्रणश्यति॥॥ ९.३१ ॥

kṣipraṁ bhavati dharmātmā śaśvac-chāntiṁ nigacchati / kaunteya pratijānīhi na me bhaktaḥ praṇaśyati

हमारे शब्दों में

वह जल्दी ही धर्मात्मा होकर सदा की शान्ति पा लेता है। अर्जुन, यह निश्चय के साथ कहो — मेरा भक्त कभी खोता नहीं।

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता ९.३१ · तत्सत्