सभी श्लोकरोज़ दस मिनट का सत्संग।

Cited, never invented.

सभी श्लोक

तत्सत् के सत्संगों में आए श्लोक — गीता और दुर्गा सप्तशती से; मूल पाठ और उसका लिप्यंतरण।

सत्संग की हर बात के पीछे अध्याय और श्लोक है — छूकर मूल पाठ और लिप्यन्तरण देखें, और जहाँ अर्थ परखा जा चुका है, हमारे शब्द भी। हम मूल का ही उद्धरण देते हैं, किसी टीका का नहीं।

तत्सत् का भक्ति-सत्संग कैसे बनता है

श्लोक

गीता १२.१३

अद्वेष्टा सर्वभूतानांमैत्रः करुण एव च।निर्ममो निरहङ्कारःसमदुःखसुखः क्षमी॥॥ १२.१३ ॥

adveṣṭā sarva-bhūtānāṁ maitraḥ karuṇa eva ca / nirmamo nirahaṅkāraḥ sama-duḥkha-sukhaḥ kṣamī

हमारे शब्दों में

जो किसी भी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबसे मैत्री रखता है और करुणा से भरा है; जिसमें न ‘मेरा-मेरा’ है, न अहंकार; जो दुख-सुख में एक-सा रहता है और क्षमाशील है…

शास्त्रों की वाणी से रोज़ की भक्ति तक।

गीता १२.१३ · तत्सत्