यात्रारोज़ दस मिनट का सत्संग।

नित्य · दिन ४

खुली हथेली

खुली हथेली — सुख माँगना नहीं पड़ता, रखा जाता है

नाम-स्मरण · ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

शनिवार, १९ सितंबर

शुक्ल अष्टमी

यह सत्संग शनिवार, १९ सितंबर का था। इसका श्लोक, सूत्र और स्मरण-पत्र यहाँ बने रहते हैं।

स्रोत

प्रशान्तमनसं ह्येनंयोगिनं सुखमुत्तमम्।उपैति शान्तरजसंब्रह्मभूतमकल्मषम्॥
दिन ४ · खुली हथेली · तत्सत्